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‘’सुनो’’

                           ठीक है दिया तुम्हें वक्त,,’’ दिया वक्त तुम्हें के तुम खुद को                                          जान पाओ ,,तुम्हें मुझसे मोहोब्बत थी या नहीं                            ये गुजरते वक्त के साथ तुम खुद ही समझ जाओगी                               पर जाते जाते कुछ बातों का ख़याल जरूर रखना ,,                            अब इस सफर के दौरान सुनो !!,, तुम मेरी दुआएं …

‘’न मैं जीता न वो हारी’’

वो ये जताती थी की उसे मेरी याद नहीं आती थी                                  मैं ये जता रहा हूँ की मुझे उससे अब कोई फर्क नहीं पड़ता ,,                        इसी जताने जताने के चक्कर में यूँ ही जमाने बीत गए                             वो भी हार गयी मैं भी हार गया ,,                           और जीत गयी हमारे बीच की …

‘’चाहत’’

उनकी बात ही कुछ और थी उनका साथ ही कुछ और था                उसकी आँखें जब चमकती थी तो उनकी आँखों की चमक ही कुछ और थी,, उसकी आँखों के सागर में डूब जाने को दिल करता था                            वो जिन रास्तों से गुजरती ,उन रास्तों को रोशन करने को दिल करता था ,,              …

‘’तबाह मोहोब्बत’’

रुसवा तुम हुई खफा मेरी नींदे हुई         मुह मोड के तुम गयी जिंदगी तबाह मेरी हुई ,,     जिसे रब से जादा चाहा उस सनम की बेरुखी देख कर           उस रब ने भी कुछ आँसू तो बहा ही दिये होंगे ,,      क्या ब्याँ करूँ अब हाल-ए –दिल अपना         के अब तो …

‘’कूबूल करते हैं ‘’

       के इस कदर मेरी वफा को बेवफाई मिलेगी ,,                   ये सपना मैंने सपने में भी नहीं देखा था       चलो आज कूबूल कर ही लेते है की तुम्हें मुझसे मोहोब्बत न थी,,                       सब कुछ बस एक हसीन धोका सा था मेहमान की तरह आयी थी तुम         कुछ साल रहकर चली गयी …

‘’हम मिलेंगे ‘’

कुछ इस कदर घेरा है तेरी यादों के बादल ने मुझे ,,           के बीते पालो की बारिश में भीग सा गया हूँ नदी की तरह बहते अपने सपनों को देख ,,              आँसुओ की उठती लहरों में डूब सा गया हूँ सुना था हर किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता ,,           कहीं ज़मीं …

‘’जरूरी है ‘’

जरूरी है ,, तुमसे मोहोब्बत का होना ,, हाँ जरूरी है ,, एक झलक में ही तुम मुझे दीवाना जो कर देती हो ,, ऋत कोई भी हो मेरा हर मोसम सुहाना जो कर देती हो ,, अपनी इन गहरी गहरी जुल्फों के जाल में मुझे खुद से ही अंजान जो कर देती हो ,, …

”लुका छिपी”

यूँ मेरा नजरे झुका के तेरे सामने से निकलना ,, ऑर तेरी एक झलक पाने को मेरा चुपके से तुझे ढूँढना ,, तेरे कदमो की आहट मैं भीड़ में भी भांप लेता था ,, दोस्तो के सामने तो मेरी जुबां इकरार करने से भी डरती थी ,, पता है कितनी गुदगुदी सी होती थी ,, …