”लुका छिपी”

यूँ मेरा नजरे झुका के तेरे सामने से निकलना ,,

ऑर तेरी एक झलक पाने को मेरा चुपके से तुझे ढूँढना ,,

तेरे कदमो की आहट मैं भीड़ में भी भांप लेता था ,,

दोस्तो के सामने तो मेरी जुबां इकरार करने से भी डरती थी ,,

पता है कितनी गुदगुदी सी होती थी ,,

जब तेरे सामने से मैं गुजरता था ,,

उस लुका छुपी के खेल का मजा ही कुछ निराला था ,,

कच्ची उम्र का वो मोड ही बड़ा भोला भाला था ,,

मैं तो बस तेरे प्यार का दीवाना था ,,जिसे एक तरफा कहता ये जमाना था ,,

जिसे एक तरफा कहता ये जमाना था ,,

वो ”लुका छुपी” का खेल ही निराला था

WRITTEN BY ; Ladduuuu1023 ladduu

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